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Saturday, 19 April 2014

जिंदगी हँसने गाने के लिए है पल - दो पल !

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जिंदगी हँसने गाने के लिए हैं पल दो पल - यही वो दो पल हैं जिनके लिए , बच्चा , युवा , वयस्क या वृद्ध कोई भी तमाम उम्र बड़े जतन के साथ लगे रहते है , ये जानते हुए भी की ये कुछ पल सिर्फ कुछ पल का ही मज़ा देते हैं , लेकिन ये पल क्या हैं ? , क्या एक दूसरे को गिरा के पलों का मज़ा लेना ( नीचा दिखाना ) , या सिर्फ अपने ही लिए पलों का मज़ा लेना ( स्वार्थ रखना ) , कहने को ये सिर्फ बातें हैं या ज़िन्दगी से सम्बंधित प्रश्न , लेकिन इसको हमको समझना ही पड़ेगा , क्योंकि बेदम ज़िन्दगी जीना हमारा काम नहीं - ये प्रश्न तब उठे जब मैं ये गीत सुन रहा था , ये गीत ज़मीर फ़िल्म का है , जिसके बोल हैं - जिंदगी हँसने गाने के लिए हैं पल दो पल - तो आज के प्रश्न इस गीत से सम्बंधित हैं - प्रश्न गीत के अंतरे से सम्बंधित हैं -
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प्रश्न - जहाँ सच न चले वहाँ झूठ सही , जहाँ हक़ न मिले वहाँ लूट सही ( क्यों और कैसे ) ?

उत्तर - सच और झूट , ये भी एक प्रकृति है , जैसे ईश्वर की प्रकृति ये ब्रम्हांड रोम-रोम है , वैसे ही मानव की ये प्रकृति है और जैसे इस ब्रम्हांड का रोम-रोम पुर्जा यानी प्रकृति ईश्वर के लिए कार्य करती है , वैसे ही ये सच और झूठ पैदा होने से लेकर मृत्यु तक मानव के लिए ही कार्य करते हैं , लेकिन ये आप के निमित्त अच्छा फल तभी देते हैं , जब आपकी सोंच अच्छी हो , क्योंकि अगर ईश्वर की सोंच व संकल्प अच्छा न होता तो , हर एक चीज़ असंतुलित होती , यहाँ असंतुलन से मेरा मतलब है - हर एक प्राणी के लिए नाप-तोल के हर एक चीज़ का बनना , और यहीं पे मेरा जवाब आ जाता है - क्योंकी जहाँ सच न चले वहाँ झूठ बोलिये लेकिन इस बात को सोंच के की जिसके लिए भी मैं झूठ बोल रहाँ हूँ , या जिस बात पे मैं झूठ बोल रहाँ हूँ , उससे मुझे फायदा है व उससे दूसरे को नुक्सान भी नहीं है , और साथ ही अच्छा संकल्प भी लेना चाहिए कि अब झूठ न ही बोलना पड़े तो बेहतर होगा , क्योंकी झूठ तो झूठ ही होता है न।
और हक़ की लड़ाई तो मानव आज से नहीं लगभग आदिमानव युग से लड़ता चला आ रहा है , और रुके भी तो कैसे आखिर हक़ की लड़ाई है न भाई ? ठीक ही लिखा है इस गाने में कि " जहाँ हक़ न मिले वहाँ लूट सही " लेकिन इन शब्दों पे ज़रा सही से ध्यान दीजियेगा - जहाँ हक़ न मिले - वहाँ लूट सही , मेरा मतलब जब हक़ न मिले तब लूट , इसका मतलब लुटेरों की लूट से न लगाइएगा , मतलब अगर आप उस स्थान के अधिकारी है और आपको कोई संदेह है कि अगला हमारा हक़ मार रहा है तो आप अपनी बात को बड़े जोर के साथ रख सकते है ( वो बात भले ही है कि उस वक़्त आपके सामने वाला आपके अन्दर लूट के ही दर्शन कर रहा होगा )
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प्रश्न - तेरे गिरने में भी तेरी हार नहीं के तू आदमी है अवतार नहीं ( क्यों और कैसे ) ?

उत्तर - भगवान् के अवतारों की कहानियाँ तो आपने सुनी ही होगी , आदमी वैसे तो होते नहीं , क्योंकी गीता के अनुसार भगवान् जब इस पृथ्वी पर अवतरित होते हैं तो प्रकृति को अपने आधीन करके व मनुष्य प्रकृति के आधीन होकर ही पैदा होता है , इन सब बातों का मतलब यह है कि , अगर हम कोई भी कार्य बड़ी लगन से करते हैं व मेहनत करने पर भी सफलता सही से हाँथ नहीं लगती , तो इससे कभी आत्मबल नहीं गिरना चाहिए , क्योंकी हम सिर्फ एक आदमी हैं अवतार नहीं , सारी उम्र अपने बच्चे को बड़े जतन से लालन पालन करके पढ़ाते लिखाते व अच्छा आदमी बनाते , पर नतीजे कुछ सही नहीं लगते , कभी लड़का आपकी बात नहीं मानता , अनसुना कर देता है , तो इससे कभी आत्मबल नहीं गिरना चाहिए , क्योंकी हम सिर्फ एक आदमी हैं अवतार नहीं - और गिरने में तो वैसे भी हार नहीं होती , क्योंकि जवानों व पहलवानों का तो काम ही यही होता है - और हम किसी जवानों व पहलवानों से कम थोड़े ही हैं ( इस बात को भी कह देना चाहिए क्योंकी इससे हमारे पूर्वजों का सम्मान होता है )
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इस पोस्ट के आधार पर ये गीत , देखिएगा ज़रूर , फ़िल्म ज़मीर - बोल - ज़िन्दगी हँसने गाने के ---


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मित्रों व पाठकों आपकी मूल्यवान टिप्पणियों का सदः ही स्वागत है , टिप्पणी ज़रूर करें व ज़िन्दगी से सम्बंधित कोई भी प्रश्न आप बेझिझक पूंछे , व कोई सुझाव हो तो अवश्य दें , धन्यवाद !
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27 comments:

  1. Replies
    1. धन्यवाद व स्वागत है सर !

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  2. Replies
    1. आ. सर धन्यवाद जो आप आये व स्वागत हैं !

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  3. वाह क्या बात है आशीष भाई .. जीवन दर्शन समेट दिया इस आलेख में आपने ...

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    1. भाई जी धन्यवाद व सद: ही स्वागत हैं !

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  4. Replies
    1. बहुत धन्यवाद व स्वागत हैं !

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  5. Replies
    1. धन्यवाद हर्ष भाई व स्वागत हैं !

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  6. बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति
    भाई आशीष जी, बहुत श्रम करते हैं आप और तभी श्रम का जैसे फल मीठा होता है
    आपकी पोस्ट भी उसी तरह निखर के सामने आती है।
    बधाई

    एक नज़र :- हालात-ए-बयाँ: ''हम वीर धीर''

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    1. ब्रदर जी धन्यवाद व सदः ही स्वागत है !

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  7. बहुत सुन्दर...

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    1. आ. सर धन्यवाद व स्वागत है !

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (23-04-2014) को जय माता दी बोल, हृदय नहिं हर्ष समाता; चर्चा मंच 1591 में अद्यतन लिंक पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. धन्यवाद व आपका आभार !

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  9. फिल्मी गाने को लेख के साथ समझने की बेहतरीन कोशिश

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    1. अनु जी धन्यवाद व स्वागत हैं !

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  10. सुन्दर और सराहनीय प्रयास

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    1. आ. धन्यवाद व सद: ही स्वागत हैं !

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  11. बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति

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    1. संजय भाई धन्यवाद व स्वागत है !

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  12. सुंदर प्रस्तुति। धन्यवाद व आपका आभार ! मेरे नए पोस्र्ट पर आपका इंतजार रहेगा।

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    1. सर धन्यवाद व सदः हि स्वागत है !

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  13. एक जटिल दर्शन सार युक्त !

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    1. सर धन्यवाद व स्वागत है !

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