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जिंदगी हँसने गाने के लिए हैं पल दो पल - यही वो दो पल हैं जिनके लिए , बच्चा , युवा , वयस्क या वृद्ध कोई भी तमाम उम्र बड़े जतन के साथ लगे रहते है , ये जानते हुए भी की ये कुछ पल सिर्फ कुछ पल का ही मज़ा देते हैं , लेकिन ये पल क्या हैं ? , क्या एक दूसरे को गिरा के पलों का मज़ा लेना ( नीचा दिखाना ) , या सिर्फ अपने ही लिए पलों का मज़ा लेना ( स्वार्थ रखना ) , कहने को ये सिर्फ बातें हैं या ज़िन्दगी से सम्बंधित प्रश्न , लेकिन इसको हमको समझना ही पड़ेगा , क्योंकि बेदम ज़िन्दगी जीना हमारा काम नहीं - ये प्रश्न तब उठे जब मैं ये गीत सुन रहा था , ये गीत ज़मीर फ़िल्म का है , जिसके बोल हैं - जिंदगी हँसने गाने के लिए हैं पल दो पल - तो आज के प्रश्न इस गीत से सम्बंधित हैं - प्रश्न गीत के अंतरे से सम्बंधित हैं -
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जिंदगी हँसने गाने के लिए हैं पल दो पल - यही वो दो पल हैं जिनके लिए , बच्चा , युवा , वयस्क या वृद्ध कोई भी तमाम उम्र बड़े जतन के साथ लगे रहते है , ये जानते हुए भी की ये कुछ पल सिर्फ कुछ पल का ही मज़ा देते हैं , लेकिन ये पल क्या हैं ? , क्या एक दूसरे को गिरा के पलों का मज़ा लेना ( नीचा दिखाना ) , या सिर्फ अपने ही लिए पलों का मज़ा लेना ( स्वार्थ रखना ) , कहने को ये सिर्फ बातें हैं या ज़िन्दगी से सम्बंधित प्रश्न , लेकिन इसको हमको समझना ही पड़ेगा , क्योंकि बेदम ज़िन्दगी जीना हमारा काम नहीं - ये प्रश्न तब उठे जब मैं ये गीत सुन रहा था , ये गीत ज़मीर फ़िल्म का है , जिसके बोल हैं - जिंदगी हँसने गाने के लिए हैं पल दो पल - तो आज के प्रश्न इस गीत से सम्बंधित हैं - प्रश्न गीत के अंतरे से सम्बंधित हैं -
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